gkc आदिकाल से

हम मनुष्यों के सामक्ष आदिकाल से एक बड़ा प्रश्न यह रहा है कि मैं कौन हूं? बहुत से नामी—ग्रामी लोग आए और अपना जीवन काल भोगकर अपने पिछे अच्छी बुरी यादें छोड़ कर चले गए, लेकिन इस प्रश्न का उत्तर नही पासके या उसके प्रति बेपरवाह रहे। संसार के मायावी आकर्षणों में जकड़े रहने से इससे उन्हें इतना भुलावे में रखकर चकाचौंध कर दिया कि उन्हें कभी अपने समिप आने और खुद को समझने का अवसर ही नहीं मिला।