अत्यन्त कटु

1- सत्य अत्यन्त कटु होता है, लेकिन परिणाम में हितकर, अहितकर कर लेकिन हितकाराभासी मिथ्या जो सुबह की ओस राशि जैसी है जो सूर्य के निकलते ही विनष्ट हो जाती है।

2- वह कौन है जो मेरे एकान्‍त क्षणो में मेरे साथ है जिसके कारण मै कभी अकेला नही अनुभव करता हूँ।

3- सभ्‍यता, संकृति अन्‍तरो को दूर करती है, लेकिन

संस्‍कृति विहीन हो कर मनुष्य पथ भ्रष्‍ट हो जाता है ।

कोरी सभ्‍यतिक मानतायें अस्‍थी कंकाल समान होता है ।